The Single Screen

वो…जो खो रहा है

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MFF Diary – Day 2

with one comment

फिर लेट 

आज रास्ते में हाथी नहीं मिला, बस सुबह अपना बटुआ ही खो दिया घर में कहीं. अब काश ऐसा होता कि कल चौराहे पर हाथी की जगह बटुआ मिलता और आज बटुए की जगह हाथी खोया होता तो दोनों दिन मैं समय पर पहुँचता.

सुबह-सुबह थप्पड़ 

The Slut

जैसे किसी को नींद से जगते ही थप्पड़ मार दिया जाए, ऐसी थी आज की पहली फिल्म The Slut. Hagar Ben Asher की इस्राइली फिल्म की पहली सबसे ज़बरदस्त बात तो यही थी कि ये क्लासिक slut with a golden heart की कहानी को पलट कर slut with a selfish heart बनाने की तरफ चलती है. एक ऐसी औरत जो सब कुछ चाहती है. ढेर सारा सम्भोग, अलग-अलग आदमियों का प्यार और उनके प्यार के अलग-अलग peripheral benefits (जिनमें अपनी दो बेटियों के लिए मुफ्त की मिली साइकल भी शामिल है) और सुबह सोच कर दोपहर को अपना बच्चा गिराने की आज़ादी.

लेकिन मज़े की बात यह है कि Slut शब्द का प्रयोग भी यहाँ इसलिए है कि ऐसी औरत को आम दर्शक सबसे पहले इसी generic category में रखेगा. तो एक तरह से फिल्म का ये शीर्षक उस औरत का सच नहीं, उसका वो perception बताता है जो हम आप घर ले जायेंगे.  फिल्म के अंदर कोई भी किरदार उसको slut नहीं बोलता लेकिन देखते हुए एक point आएगा (मेरे सामने तो आया था) जहाँ आपको लगेगा कि ये एक अच्छे-खासे आदमी से, जो उससे सचमुच का प्यार करता है, और उसके बच्चों को संभाल रहा है, धोखा कर रही है. बड़ी चालू है. (मुझे याद है मेरे एक जानने वाले ने तो ‘हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी’ देखकर भी यही कहा था कि ये बस एक हरामी लड़की की हवस की कहानी थी.) और ऐसे point पर फिल्म आपको अपने moral system से मुखातिब कराती है. Uncomfortable करती है ये दिखाकर कि आप जो हैं और आप जो होना चाहते हैं, वो दो पहाड़ हैं और बीच में एक खाई है.

फिल्म की दूसरी शानदार बात – इसकी निर्देशिका Hagar Ben Asher जो तामार नाम की औरत की मुख्य भूमिका में भी खुद हैं. ज़बरदस्त मिश्रण था उनके चेहरे में थकान और explosive energy का. और एक बहुत ही undecipherable सा भाव जो फिल्म के अंत तक बना रहा और इसकी open-ending के सूत्र सा लटकता रहा.

और बाकी सब भी शानदार था. जब भी मौका मिले, ज़रूर देखें. (और खुद को परखें भी.)

नया देश, नयी कहानी

Distance

दूसरी फिल्म देखी Guatemala के Sergio Ramirez की Distancia (Distance). वैसे साथ गए ज्यादातर फिल्मचियों को ये पसंद नहीं आई लेकिन मुझे अच्छी लगी. Filmmaking थोड़ी कच्ची थी लेकिन कहीं भी नकली नहीं थी. कहानी भी ज़रा सी ही थी. एक छोटे से गाँव में एक बूढा अपनी २०-साल से खोई हुई बेटी को ढूँढने के लिए desperation की इस हद तक जा चुका है कि जब गाँव के पास एक जगह mass graves निकलती हैं तो वहाँ भी रोज़ चक्कर लगाता है और पूछता है कि उसकी बेटी के पिंजर मिले क्या. फिर एक दिन बेटी मिल जाती है. जिंदा. कहीं दूर के गाँव में. और बूढा किसान अपनी बेटी से मिलने निकल पड़ता है. बेटी से उसका मिलना फिल्म का अंतिम दृश्य है लेकिन अब बेटी उसकी भाषा तक नहीं बोलती. बूढा बेटी को उसकी ही बचपन की कॉपी देता है जिसमें बेटी ने अपने पिता की (यानी इसी बूढ़े की) कहानी लिखना शुरू किया था और पिछले २० सालों में बूढ़े ने उस कहानी को पूरा कर दिया है. (मैंने पूरी कहानी इसलिए दे दी यहाँ क्योंकि मुझे उम्मीद नहीं कि ये फिल्म कभी भी torrent पर आएगी.)

बेटी के गायब होने के पीछे Guatemala के दर्द की कहानी है. Military rule के चलते एक समय पर वहाँ बहुत massacre हुए और बेटी उसी बुरे दौर में बाप से छूट गयी. फिल्म काफी understated थी – काफी शांत सी. यही कहानी अगर hollywood बनाता तो शायद हर emotion स्क्रीन से कूद-कूद कर खुद ही हम पर आ गिरता. शायद यही कमी भी लगी सबको. जैसा कि moifightclub ने कहा – “फिल्म कहना बहुत कुछ चाहती थी, कहने को था भी बहुत कुछ, पर कहा नहीं.”

Generation Pop

देखने जाने वाले थे हमारे पसंदीदा Ricardo Darin की Chinese Takeaway लेकिन २ घंटा पहले पता चला कि वो कैंसल हो गयी. ज्ञानी लोगों ने बताया Generation P नाम की एक फिल्म है जो बहुत अच्छी होने की संभावना है. Wikipedia पर थोड़ा पढ़ा तो कुछ खास समझ नहीं आया. बस यही लगा कि हाँ किसी अच्छे novel पर based है तो arbit नहीं होगी. लाइन लगाने पहुँचे तो वहाँ अनुराग कश्यप दिख गए, तो थोड़ा भरोसा और बढ़ा कि शायद अच्छी ही फिल्म हो.

Che has a special appearance too

ये सब भूमिका इसलिए क्योंकि जब फिल्म देखकर बाहर निकला तो ऐसा लगा पार लग गया आज. जो फिल्म किस्मत से देखने गया था वही शायद इस फेस्टिवल की सबसे शानदार फिल्म हो. (कम से कम मेरे लिए क्योंकि मैंने असल में दो सबसे बड़ी फिल्में जो सब रंग-मिजाज़ के लोगों को बराबर पसंद आयीं, Michael और The Artist, दोनों ही miss कर दीं आज.) लेकिन बिना उन चीज़ों को बीच में लाये जो हुयीं ही नहीं, मेरे ख़याल से Victor Ginzburg की Generation P वो cinematic घटना है जो साल में एक बार ही होती है. शब्दों, विचारों, theories, statements, cynicism और subversion से ठूंस-ठूंस कर भरी इस फिल्म को बहुत आसानी से decode नहीं किया जा सकता. ऊपर से बहुत से references ठेठ Russian थे जिनको समझने के लिए लंबे समय तक रूस से दिल लगाना पड़ेगा.

लेकिन उसके बावजूद, जितना समझ में आया वो कुछ दिनों के लिए दिमाग खराब करने जितना काफी था. एक Post-modern novel पर एक बहुत ही जोशीली post-modern film बनाने की कोशिश की Victor Ginzburg ने और कम से कम मुझपर तो इस हद तक सफल हुए कि पूरी फिल्म में मैं या तो ताली बजाता रहा या अपनी सीट में उछलता रहा या मुस्कुराता रहा. Drugs-induced hallucinations को visual arts पढ़ चुके Victor ने कला की चरम तक फिल्म के narrative में इस्तेमाल किया है.

वैसे फिल्म देखकर सबसे पहली याद अनुराग कश्यप की No Smoking की ही आई. खास कर के फिल्म का अंतिम हिस्सा. लेकिन इसे सिर्फ brotherhood of drugs and subversion कहा जा सकता है, एक खास तरह की imagery और extreme pro-Individual कथानक – उससे ज़्यादा दोनों फ़िल्मों को जोड़ना शायद over-simplification हो जाएगा.

(इतना लिखने के बाद भी मैं वैसे अब तक फिल्म के बारे में कुछ बता नहीं पाया हूँ इसलिए अब कोशिश छोड़ता हूँ. बस फिल्म के दौरान मैंने जो notes बनाए थे उनमें से कुछ को as-it-is नीचे छाप रहा हूँ. इनमें फिल्म की lines, references, random snatches दिख जायेंगे. बाकी इस फिल्म को जानने का एक ही रास्ता है और वो है इसे आँख गडा के देखना.)

  • Legend of Ishtar
  • Fly agaric mushroom
  • “He looked like the final fragment of some parallel universe.”
  • Valhalla – heaven of Viking Warriors
  • (Death is when…) threads disappear but the sphere remains.
  • Tower of babel looked like an ancient multi-level parking lot.
  • “Man is wolf to man” “Also, man is wow to man” “Also, man himself is a wow in today’s times” “Hence, wow is wow to wow”.
  • TV is a modern-day human sacrifice altar.
  • “First class lord for first class people” (tagline for an ad for God’s repositioning in our market economy)
  • “Don’t worry about looking too stupid, worry about looking too smart.”
  • “Collective unconscious…” (drives the world)
  • “What’s your political view?” “Uhm…upper left.”
  • Inner tits.
  • Every politician is a TV show.
  • Pizdyet – the five legged dog.
  • 30 butterflies flew for eternity in search of their King Sembergh* never realizing Sembergh* means 30-butterflies only. (*Sembergh – Am not sure I got that name right.)

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Written by The Single Screen

October 16, 2011 at 8:32 am

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