Lyrics of MASAAN

The latest album I wrote two songs for is Neeraj Ghaywan’s MASAAN. The third song, BHOR, is written by Sanjeev Sharma, Indian Ocean’s regular collaborator.

Album credits are here.

Masaan Credits

1. Tu Kisi Rail Si

मुखड़ा 
तू किसी रेल सी गुज़रती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ
तू भले रत्ती भर ना सुनती हो
मैं तेरा नाम बुदबुदाता हूँ।
किसी लम्बे सफर की रातों में
तुझे अलाव सा जलाता हूँ।
अंतरा 
काठ के ताले हैं
आँख पे डाले हैं
उनमें इशारों की चाबियाँ लगा
रात जो बाकी है
शाम से ताकी है
नीयत में थोड़ी खराबियाँ लगा
 
Bridge: 
 
मैं हूँ पानी के बुलबुले जैसा
तुझको सोचूँ तो फूट जाता हूँ।
तू किसी रेल सी गुज़रती है
मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ।
2. Mann Kasturi 
मुखड़ा 
मन कस्तूरी रे जग दस्तूरी रे
बात हुयी ना पूरी रे
मन कस्तूरी।
पाट ना पाया मीठा पानी
ओर-छोर की दूरी रे
मन कस्तूरी।
खोजे अपनी गंध ना पावे
चादर का पैबंद ना पावे
बिखरे-बिखरे छंद सा टहले
दोहों में ये बंध ना पावे
नाचे हो के फिरकी लट्टू
खोजे अपनी धूरी रे
मन कस्तूरी रे।
अंतरा 
उमर की गिनती हाथ ना आई
पुरखों ने ये बात बताई
उल्टा कर के देख सके तो
अम्बर भी है गहरी खाई
रेखाओं के पार नजर को,
जिसने फेंका अंधे मन से
सतरंगी बाजार का खोला
दरवाजा फिर बिना जतन के
फिर तो झूमा बावल हो के
फिर तो झूमा बावल हो के
सर पे डाल फितूरी रे
मन कस्तूरी रे।
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